लक्ष्मीपूजन - Lakshmipujan
आश्विन अमावास्येला लक्ष्मीपूजन येतं. या दिवशी प्रात:काळी मंगलस्नान करून देवपूजा करावी. प्रदोषकाळी फुलांनी सुशोभित केलेल्या मंडपात लक्ष्मी, विष्णू इत्यादी देवता आणि कुबेर यांची पूजा करावी. यादिवशी घर-गोठा स्वच्छ करून घरात गोमुत्र शिपंडून घर पवित्र करतात. व्यापारी लोक त्यांच्या वह्या-चोपड्यांची पूजा करतात. या दिवसानंतरच व्यापारांचे नवीन आर्थिक वर्ष सुरु होते. बाजारात लक्ष्मीच्या मूर्ती मिळतात, त्यांना घरी आणून त्यांची पूजा करण्याची देखील पद्धत आहे.
| सामुग्री | ||
| गणपती | हळकुंड 05 नग | पळी 01 नग |
| शंख | खडीसाखर 20 ग्रॅम | भांडे ( पंचपात्री ) 01 नग |
| घंटी | सुके खोबरे 02 नग | स्टिलची ताटे 02 नग |
| हळद 25 ग्रॅम | गुळ 250 ग्रॅम | समई 01 नग |
| कुंकू 25 ग्रॅम | पंचखाद्य 50 ग्रॅम | निरांजन ( तेलाचे व तुपाचे ) प्रत्येकी 01 नग |
| गुलाल 25 ग्रॅम | नारळ 04 नग | पंचामृत 01 वाटी |
| अभिर 25 ग्रॅम | तांदुळ 02 किलो | नैवेद्य पेढे पाव किलो |
| अष्टगंध 25 ग्रॅम | द्रोण 25 नग | गाईचे तुप 100 ग्रॅम |
| चंदन पावडर 25 ग्रॅम | पंचे 01 नग | मध 01 बाटली |
| रांगोळी 250 ग्रॅम | ब्लाऊज पिस 02 नग | चौरंग 01 नग |
| गोमुत्र 01 बाटली | विविध प्रकारची सुवासीक फुले ½ किलो | पाट 01 नग |
| सुतगुंडी 01 नग | बेल पत्र 20 नग | आसने 03 नग |
| पंचरंगी धागा 01 नग | तुळस 01 जुडी | ताम्ह्न 03 नग |
| अत्तर 01 बाटली | दुर्वा 02 जुडी | तांब्याचे तांबे 02 नग |
| जानवी जोड 02 जोड | फुलांचे हार 01 नग | गुलाब पाणी 01 बाटली |
| धुप 50 ग्रॅम | आंब्याचे डहाळे 02 नग | गंगाजळ 01 बाटली |
| माचिस 01 नग | गजरे 02 नग | अगरबत्ती 01 पुडा |
| कापुर 20 ग्रॅम | वेण्या 01 नग | मोठ्या सुपार्या 20 नग |
| तेल वाती 01 नग | विड्याची पाने 40 नग | बदाम 05 नग |
| तुप वाती 01 नग | फळे 05 नग ( 01 संच ) | खारिक 05 नग |
| तिळाचे तेल ½ लिटर | केळी 06 नग | अक्रोड 05 नग |
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